क्या Gen Z की भाषा विरोध का परिणाम है या राजनीति के बदले हुए माहौल का प्रतिबिंब?

gen z politics india : बदलती राजनीति पर एक विश्लेषण

क्या Gen Z की भाषा विरोध का परिणाम है या राजनीति के बदले हुए माहौल का प्रतिबिंब?

जेन-जी गाली नहीं दे रहा है बल्की वो केंद्र में बैठी सत्ता को वो सब लोटा रहा है जो सत्ता और उसके चाटुकारों ने पिछले बारह वर्षों में उन्यासी वर्ष पुराने बुढे भारत को दिया!!किसी भी सरकार की नीति गलत हो सकती है लेकिन नीतिगत दोष व्यक्तिगत दोष देकर दूर नहीं किए जा सकते सकते।गांधी को गाली देने वाले चेहरे पर लगे कान आज खुद पर अपशब्द नहीं सुन पा रहे हैं और सत्ताकेचाटुकार देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi पर बोले गये शब्दों से आहत हैं जो को दोगे वहीं बदले में वही मिलेगा।। ये प्राकृतिक नियम तय है।।

Is Gen Z's language a result of protest or a reflection of the changed climate of politics?

मै गाली का घोर विरोधी हूं लेकिन सत्ता के नीतिगत विरोध के बदले में हमने भी गालीयों के गुलदस्ते देखें है।सत्ताकेचाटुकार सदस्यों ने सत्ता की गलत नीतियों के खिलाफ बोलने वालों को या सच बोल कर झूठ झूठलाने वालों को भद्दा बोला, पाकिस्तानी, खालिस्तानी, मां-बहन की गालीयों से पुरस्कृत किया है और आज भी उनका ये कुकृत्य जारी है सत्ता पहले अपने चाटुकारों को रोक ले उनसे बाहर के लोग अपने आप रुक जाएंगे।

संसद की रूह कांप जाएगी अगर गांधीवादी एक बार अपना अहिंसक सिद्धांत छोड़ दें तो उनके केवल सात्विक शब्दों को सत्ता और उसके चाटुकारों को हजम करना मुश्किल हो जाएगा। सत्ता की चाटुकारिता वाले लोगों को गलियारों से बहरा होकर निकलना पड़ेगा। तुम्हारी गाली से ज्यादा ताकत है सात्विक भाषा में।

देश के प्रधानमंत्री तक की भाषा टूटी हुई है। जो मन में आता है बोल देता है। वो पुर्व प्रधानमंत्री की पत्नी जो की जो पहले एक महिला है बाद में कोई विदेशी नागरिक और उसके बाद कहीं जाकर भारत के पुर्व प्रधानमंत्री की पत्नी उसे “जर्सी गाय” कह कर सम्बोधित किया था तो क्या वो किसी की मां, बहन, बेटी, बहु या पत्नी नहीं थी?मंडी की महिला सांसद Kangana Ranaut महिलाओं पर बद्दी टिप्पणियां करने से नहीं चूकती ना ही कभी अफसोस जताती। Kailash Vijayvargiya, Amit Shah जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता भी गिरी हुई भाषा का प्रयोग करते रहते हैं।
क्या किसी महिला पर एसे व्यंग्य कसते हुए अपनी मां या बहन का ख्याल नहीं आता ?

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पं० बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर, गुजरात, उड़िसा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की आंदोलन कारी प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ जो दुर्व्यवहार अतीत में किया गया वर्तमान में भी स्थिति और अधिक खराब हुई है। इसपर र प्रधानमंत्री का आंसु तक ना टपका और मेरी हुई मां पर गंगा बहा दी उस पर जवाबदेही क्यों नहीं? कौन देगा जवाब देही?

क्या उस मां ने उस दिन उस पर कोई रिएक्शन नहीं था अगर था तो सार्वजनिक तौर पर माफी क्यों नहीं मांगी गयी?

अगर गाली या अपशब्द के आधार पर ही गिरफ्तारियां होती तो नरेन्द्र मोदी को जेल में पड़े ही 22 साल हो गये होते। अपनी मरी हुई मां पर अपशब्द बर्दाश्त नहीं हुए लेकिन दिल्ली पुलिस ने लड़कियों के गूदा द्वार में लाठी घुसाने, कपड़े फाड़ने, वक्ष स्थल पर हाथ मलने, शारीरीक मोलैस्ट करने जैसे सैकड़ों घटनाएं देखने को मिली उन्हें नज़रंदाज़ कर दिया गया। उन बेटियों पर पुलिसिया दमन पर क्या कार्रवाई हुई? उन सब पर तो एक शब्द नहीं बोला पाया।

मैं कांग्रेस का बांकपन से विरोधी रहा हूं। बहुत छोटी उम्र में धुर विरोधी हो गया था तब से तथ्य और सत्य के आधार फैसले लेता हूं। उसके बाद “आजादी बचाओ आंदोलन” का बाल सदस्य के रूप में शामिल हुआ और देश भर में बहुत कुछ देखा लेकिन कभी जुबान नहीं टुटी।

कालेज के दिनों तक आते आते मैंने सीआईडी- सीबीआई की धरपकड़ को सहा है केंद्र में निर्वाचित Indian National Congress और कांग्रेस अध्यक्ष @soniagandhi की तानाशाही को झेला है मेरे साथ काम करने वाले और पढ़ने वाले बहुत से मित्र इस बात को जानते थे। उस समय भी कांग्रेस की नीतियों और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से राजनैतिक लड़ाई थी उसे सार्वजनिक तौर पर कभी भी अनैतिक नहीं होने दिया गया। वावजूद इसके मेरे सामने कोई महिला को शब्दों के बाण से निर्वस्त्र करेगा तो भरी सभा में भीष्म पितामह बनने से ज्यादा से बेहतर मैं कृष्णा बनना पसंद करूंगा।

2014 में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम और दबाव से सत्ता में बदली गयी। नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार आई हमें लाठी, गोली व गिरफ्तारियां ही मिलनी थी देश के‌शिर्ष पर सत्ता जरूर बदली थी लेकिन हमारी नज़र में सत्ता नहीं केवल चेहरा बदला था। पहले कांग्रेस थी अब #कांग्रेसयुक्तभाजपा। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर World Economic Forum, World Bank Group और World Trade Organization – WTO एवं उनके सह काम करने वाली विदेशी कम्पनियों ने चुन लिया था। ठीक वैसे जैसे सरदार डा. मनमोहन सिंह को चुना गया था।

सत्ता की ज्यादतियां बाद में शुरू हुई पहले बिलों में कैद चाटुकारों के पर निकल आए। हर विरोधी को कांग्रेसी मानकर गालीयों से पुरस्कृत किया गया। लेकिन हर कोई कांग्रेसी, पाकिस्तानी, खालिस्तानी और देशद्रोही नहीं होता। बारह वर्षों तक गालीयां झेलने वालों ने गाली का रास्ता अपना

और जो सत्ता को झेल रहे थे वो सत्ता का रास्ता अपनाएंगे। देश के प्रधानमंत्री को भी अपने पद की गरीमा रखनी चाहिए। नरेंद्र मोदी की मां ही आदरणीय नहीं है बल्की दुनिया की हर मां आदरणीय है दुनिया की प्रत्येक #नारी पूजनीय है, हर मां और बहन सम्माननीय है, और हर बेटी आदरणीय है। राजनैतिक महत्वाकांक्षा में निजी लड़ाई और अपशब्द पलट कर आते हैं और वार अपने पर करते हैं।सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने और अपने 105मिलियन चाटुकारों के प्रतिनिधित्व में देश के सामने #स्वतंत्रतादिवस को शर्मसार होकर #देश से माफी मांगे और अपने अतीत के कुकृत्यों के सबक जरूर लें क्योंकी कर्म पलट कर जरूर आते हैं।

यह लेख राजनीतिक संवाद, सार्वजनिक भाषा, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक आलोचनात्मक राय प्रस्तुत करती है। आपका दृष्टिकोण क्या है—क्या सार्वजनिक जीवन में भाषा और गरिमा दोनों पक्षों के लिए समान मानदंड होने चाहिए? अपनी राय कमेंट में साझा करें।

हिमांशु युवा बलाश
राष्ट्रीय युवा संयोजक

आजादी बचाओ आंदोलन

Leave a Comment

Your Ímeèlì address will not be published. Required fields jẹ́ marked *

Scroll to Top