आंदोलन समाचार

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पर्यावरण असंतुलन के लिए विकसित राष्ट्र सहित मानवीय लालच जिम्मेदार :- श्री आनंद मालवीय

आजादी बचाओ आंदोलन के तत्वावधान में जूम बैठक दिनांक 6 जनवरी 2023 को संपन्न हुई।इस जूम बैठक के मुख्य वक्ता इलाहाबाद के आंदोलन के साथी तथा पर्यावरणविद् श्री आनंद मालवीय थे। इस बैठक का मुख्य विषय ‘बदलता पर्यावरण, कारण और बदलने के प्रयास : जिम्मेदार कौन कार्पोरेट, आर्थिक महत्वाकांक्षा या दबी सहमी सरकारें’ ? श्री आनंद मालवीय ने इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बातें रखी।उन्होंने शुरुआत करते हुए कहा कि पर्यावरण का अर्थ है परि+आवरण पेड़ पौधे तथा जीव जंतु पर्यावरण में एक दूसरे को नियंत्रित करते हैं। पर्यावरण की चिंता प्राचीन समय से रही है। भारतीय साहित्य प्रकृति के साथ सायुज (सहोदर) बनाने पर जोर देता रहा है। प्राचीन काल में प्लेटो ने कृषि को भी पर्यावरण में हस्तक्षेप माना करते थे। लेकिन recycle होने तक इस व्यवस्था से कोई विशेष दिक्कत नहीं थी।   औद्योगिक क्रांति से यह संतुलन बिगड़ना उस वक्त शुरू हुआ,जब उत्पादन से तेजी से बढ़ा। आवश्यकता के बदले बाजार के लिए उत्पादन होने लगा। फ्रेंच अर्थशास्त्री का कथन काफी चर्चित हुआ, जब उसने कहा कि ‘एक झूठा अहंकार आ गया कि विज्ञान ने प्रकृति को जीत लिया है।’Supply credits its own demand. बाजारवाद का यह सूत्र वाक्य है। 19वीं शताब्दी के एक सामाजिक चिंतक डीन इंज ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन हमें कई रूपों में दिखता है।              प्रारंभ में यह केवल वायुमंडलीय प्रदूषण के रूप में ही दिखता था। अब यह ध्वनि, जल, जैविक प्रजातियों के विलोपीकरण, कुछ वनस्पतियों का विलुप्तिकरण तथा ओजोन परत में छिद्र के रूप में दिखता है। यह जलवायु परिवर्तन के रूप में भी दिखता है। औद्योगिक उत्पादन जीवाश्म ईंधन का प्रयोग करता है।         खनिजों का अंधाधुंध प्रयोग मनुष्य के लालच का बड़ा कारण है।विकास कार्यों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए भी प्रकृति को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।यहां पर उन्होंने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा कि धरती सभी की आवश्यकता है पूरी कर सकती हैं लेकिन किसी एक इंसान के लालच को पूरा नहीं कर सकती। 2012 के आंकड़ों के अनुसार विकास परियोजनाओं के कारण प्रतिवर्ष औसतन 30 लाख हेक्टेयर वन नष्ट किया जा रहे हैं।ग्लोबल वार्मिंग या जलवायु परिवर्तन का ताज़ा उदाहरण को अगस्त 2020 के बांग्लादेश में आई बाढ़ से समझा जा सकता है। सरकारी आंकड़े और उपग्रह से प्राप्त जानकारी के अनुसार उस वक्त बांग्लादेश का 24 से 37% क्षेत्रफल जलमग्न हुआ था। उस क्षेत्र के 10 लाख घर और लगभग 47 लाख लोग प्रभावित हुए थे। बांग्लादेश का लगभग दो तिहाई इलाका समुद्र तल से 5 मीटर से कम ही ऊंचा है। अगर वहां के समुद्र के जलस्तर में 30 से 35 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई तो बांग्लादेश के तटीय इलाकों में रहने वाले करीब साढे तीन करोड़ लोग विस्थापित हो सकते हैं। यह बांग्लादेश की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा है।          पर्यावरण असंतुलन आधुनिक दौर में असमानता के सबसे विचलित करने वाले पहलुओं में से एक है। यह दुर्भाग्य है कि पृथ्वी को प्रदूषित करने में जो सबसे कम जिम्मेदार राष्ट्र है, वहीं इसका खामियाजा सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं। पृथ्वी को गर्म करने में औसत बांग्लादेशी की तुलना में औसत अमेरिकी 33 गुना ज्यादा जिम्मेदार है। वैश्विक पर्यावरण के 40 फीसदी हिस्से की बर्बादी के लिए दुनिया की 10 फीसदी अमीर जिम्मेदार हैं। इसके उलट अति गरीब जनता की जिम्मेदारी केवल 5 फीसदी बनती है।उन्होंने अंत में कहा कि अगर दुनिया में पर्यावरण असंतुलन को समाप्त करना है तो विकसित और अमीर राष्ट्रों को इसकी पहल करनी होगी तथा इंसान को लोभ और लालच के बल पर अपनी बनाई हुई जीवन शैली को समाप्त करना होगा।         मुख्य वक्ता के भाषण के बाद सवाल जवाब का भी एक छोटा सा सत्र हुआ तथा उत्सुक प्रतिभागियों द्वारा कुछ रोचक टिप्पणी की गई. आंदोलन के संयोजक डॉक्टर मिथिलेश डांगी जो कि उस वक्त कॉरपोरेटी लूट के प्रतिरोध को स्वर देने छत्तीसगढ़ में थे, ने कहा कि छत्तीसगढ़ के हसदा वन क्षेत्र, जिसे कांग्रेसी हुकूमत के समय अदानी समूह को दिया गया था लेकिन उस वक्त तक वहां के जंगल को काटने की इजाजत अदानी समूह को नहीं थी। विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के अगले दिन ही कई लाख हेक्टर पेड़ उस वन क्षेत्र से काट दिए गए। यह छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा की जाने वाली कारपोरेटी लूट का एक नमूना है।इस ज़ूम बैठक में अपनी बात कहने वाले उपरोक्त साथी के अलावे सीलम झा, हंसमुख भाई पटेल, प्रदीप जी, दिवाकर जी, हिमांशु युवा बलाश, मनीष सिन्हा सहित अन्य साथी मौजूद थे।

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गौतम अडानी द्वारा राजस्थान के मरुभूमि को ओएसिस में बदलने की नीति को जन-आंदोलन द्वारा रोकने की आवश्यकता- डाक्टर डांगी

23 दिसंबर 2023 को आजादी बचाओ आंदोलन की जूम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राजस्थान के परिपेक्ष में अदानी के लूट पर आजादी बचाओ आंदोलन के संयोजक डॉक्टर मिथिलेश कुमार दांगी ने अपनी बात रखा।उन्होंने देश की शुरुआत करते हुए कहा कि राजस्थान का नाम आते ही शेष भारत के लोगों के मस्तिष्क में सिर्फ रेगिस्तान ,कटीली झाड़ियों के जंगल और राजपूत राजाओं के किलाओं का चित्र उभरता है परंतु ऐसा नहीं है। इस प्रदेश में भी प्रकृति ने भरपूर प्राकृतिक संसाधन दिए हैं।उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि भारत में चांदी का जितना भंडार है उसका 98% भाग राजस्थान में पाया जाता है। उसी प्रकार जिप्सम 82% ,पोटाश 94%, ब्लास्टोनाइट 100%, स्फटिक 66%, तांबा 54%, एस्बेस्टस 96%, वेंटो नाइट 75%, ओकरा 81% तथा संगमरमर 63% भंडार राजस्थान में उपलब्ध है।  इस प्रदेश में 79 प्रमुख खनिज पदार्थ बहुतायत में पाए जाते हैं । इन खनिजों को लूटने के लिए कई देशी विदेशी कंपनियां गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं । कुछ ने तो अपना कार्य प्रारंभ भी कर दिया है । इन खनिजों के अलावा राज्य में विस्तृत खाली भू भाग भी है जिस पर ग्रीन एनर्जी के नाम पर सोलर पावर तथा पवन ऊर्जा उत्पादन हेतु विशाल क्षेत्र अदानी समूह को दिया गया है।यह सर्वविदित है कि अडानी समूह और अन्य कंपनियों के मालिक इन उपकारों के बदले राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भारी चंदा देकर इन सरकारों से जन विरोधी कार्य करवाती हैं। राजस्थान का भौगोलिक क्षेत्रफल की चर्चा करते हुए उन्होंने आगे बताया कि इसका क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है अर्थात 3 करोड़ 42 लाख 23 हजार 900 हेक्टेयर है, जो भारत के राज्यों में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है।इसकी लंबाई 826 किलोमीटर तथा चौड़ाई 869 किलोमीटर है।इसकी जनसंख्या लगभग 7 करोड़ है तथा यह जनसंख्या के आधार पर भारत में सातवें स्थान पर आता है। राज्य में जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। राजस्थान की नदियां राजस्थान का अधिकांश भाग शुष्क है परंतु यहां कई नदियां हैं जो कृषि एवं अन्य उपयोगी कार्यों के लिए बहु उपयोगी हैं तथा उन नदियों में सालों भर पानी भी रहता है इनमें से प्रमुख हैं चंबल जिसकी लंबाई 965 किलोमीटर है।अन्य नदियों में लूणी,माही ,पार्वती, बनास, साबरमती, साहिबी तथा अरवरी है। राजस्थान के वन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में कुल वन का क्षेत्रफल 328 62.5 वर्ग किलोमीटर है यह क्षेत्रफल राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9. 54 प्रतिशत है जो देश के वांछित क्षेत्रफल से बहुत कम है। हालांकि इन वनों से राज्य घरेलू उत्पाद में 716 करोड रुपए का योगदान भी मिला है। राज्य में  राज्य में खनिज संसाधनों की स्थिति पर भी उन्होंने बात रखी। डॉक्टर डॉगी इस मुद्दे पर कहा कि राजस्थान खनिज संपदा की दृष्टि से एक संपन्न राज्य है। देश के कुल खनिज में इस प्रदेश का लगभग 22% योगदान है ।इस प्रदेश में वर्तमान में 79 प्रकार के खनिज मिलते हैं । जिनमें 56 खनिजों का ही व्यावसायिक दोहन किया जा रहा है। इन खनिजों का उत्पादन देश के कुल खनिज उत्पादन का 9% है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में खनिज क्षेत्र का योगदान 4.4% है।देश के कुल कच्चे तेल उत्पादन का 24% राजस्थान के बाड़मेर जिले से प्राप्त होता है जो भारत में मुंबई हाई पेट्रोलियम क्षेत्र के पश्चात दूसरा स्थान रखता है।खनिज भंडारों की दृष्टि से यह देश में झारखंड एवं मध्य प्रदेश के बाद तीसरा सबसे समृद्ध राज्य है।राज्य में खनिज संपदा के विविध प्रकारों के भंडार के कारण राजस्थान को “खनिजों का अज़ाबघर ” की उपमा से अलंकृत किया गया है। राजस्थान जैस्पर, बोलोस्टोनाइट , गार्नेट का समस्त भारत में एकमात्र उत्पादक राज्य है।सीसा ,जस्ता ,टंगस्टन, जिप्सम, फ्लोराइट ,मार्बल, एस्बेस्टस , रॉक फास्फेट, फेल्सपार , सोप स्टोन एवं चांदी के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर विराजमान है । राजस्थान में वर्तमान समय में लगभग 1,90,000 बैरल खनिज तेल का उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है । राज्य में धात्विक और धात्विक ईंधन तथा आण्विक चारों प्रकार के खनिज पाए जाते हैं प्रमुख खनिजों के भंडार इस प्रकार हैं स्रोत इंडियन मिनरल बुक 2015 से 2020 तक    नाम भंडार  मिलियन टन में ऊपर के इन खनिजों का बाजार मूल्य 2 अरब 96 करोड़ 31 लाख 53 हजार 504 करोड रुपए अर्थात 296 31.54 ट्रिलियन रुपया होता है।अगर इस कुल मूल्य का आकलन प्रति व्यक्ति किया जाए तो राजस्थान के प्रति व्यक्ति यह 42 लाख 33 हजार 76 होते हैं । यह तो मात्र यह तो मात्र 24 खनिजों के मूल्य का आकलन दिया गया है अगर शेष सभी खनिजो और पेट्रोलियम पदार्थ के मूल्य को भी जोड़ दिया जाए तो या आंकड़ा एक करोड़ के आसपास आ जाएगा। ऊपर के तालिका में मार्बल, ग्रेनाइट, गार्नेट, पेट्रोलियम, एमराल्ड,सोप स्टोन , ऐपेटाइट, एस्बेस्टस , बेरिल, सेंडस्टोन, बेंटोनिट ,फुलर्स अर्थ, ओकरा इत्यादि के मूल्य की गणना नहीं की गई है।  राजस्थान में अदानी के परियोजनाओं पर उन्होंने विस्तार से अपनी बातें रखी।उन्होंने बताया कि अदानी समूह ने राजस्थान में कई परियोजनाओं में निवेश करने का वायदा किया है जिसके कारण इस प्रदेश का बड़ा भूभाग और कई संसाधन उसके कब्जे में आएंगे।राजस्थान में अदानी समूह के प्रमुख परियोजनाएं पर उन्होंने दृष्टिपात किया। 1. सौर ऊर्जा उत्पादन  विस्तार से अपनी बात रखने के बाद डॉक्टर डांगी ने स्पष्ट कहा कि राजस्थान सहित देश के प्रत्येक भागों में जिस प्रकार विविध संसाधनों का कॉर्पोरेटीकरण या (अदानीकरण) हो रहा है उसे जन-आंदोलन के द्वारा ही दूर किया जा सकता है। मीटिंग का संचालन जलधारा अभियान, राजस्थान के उपेन्द्र सक्सेना जी ने किया। जूम मीटिंग में शामिल प्रमुख साथियों में उपेंद्र सक्सेना, धनीराम, मोहित(राजस्थान), कर्नाटक से विद्या, प्रवीर व पीटर, गुजरात से हसमुख भाई पटेल व उषा पटेल, हरियाणा से हिमांशु व राजकुमार भारत तथा यूपी से प्रदीप पाठक उपस्थित थे।

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भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर विशेष परिस्थिति में ही मुआवजा अंतिम विकल्प होना चाहिए :-डॉक्टर मिथिलेश कुमार डांगी

आजादी बचाओ आंदोलन के आंदोलनकारी की ज़ूम बैठक (शनिवार) 4 नवंबर को संपन्न हुई।इस बैठक में आंदोलन के संयोजक डॉक्टर मिथिलेश डांगी ने आंदोलन का पक्ष रखते हुए कहा कि जहां-जहां जमीन अधिग्रहण का आंदोलन चल रहा है, वहां पर आंदोलन का स्पष्ट मानना है कि हमें शुरुआत से ही सरकार की मुआवजा नीति पर संतुष्ट नहीं होना है। आंदोलन की पूरी कोशिश यह रहनी चाहिए कि विशेष परिस्थिति में ही सरकार के द्वारा जमीन अधिगृहत हो, मुआवजा अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने झारखंड के विभिन्न जिलों में चल रहे भूमि अधिग्रहण पर आजादी बचाओ आंदोलन के सक्रियता की जानकारी दी। उन्होंने आंदोलन के साथियों से अगले महीने मध्य प्रदेश के कटनी जिले में संभावित आजादी बचाओ आंदोलन के बैठक में सर्वसम्मति से फैसले लेने पर बल दिया।डॉक्टर डांगी ने यह भी कहा कि पुराने साथियों को आंदोलन से जोड़ने की जरूरत है। इसी क्रम में सभी साथियों के साथ आंदोलन के रणनीति को लेकर एक बैठक की जानी चाहिए। यह बैठक भविष्य में देहरादून या गोड्डा में साथियों की सहमति से कराई जा सकती है। श्री आनंद मालवीय ने भी इस जूम मीटिंग में आंदोलन की विचारधारा पर बात करते हुए कहा कि बड़े कॉरपोरेट्स से छोटे दुकानदारों को बचाने के लिए हमें उन दुकानदारों से सामान खरीदने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने लोकल फार वोकल की बात अपने ढंग से करते हुए कहा कि हमें देसी सामान खरीदने और उसे पहनने की कोशिश करनी चाहिए। आंदोलन के विचारधारा पर बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हमें सांप्रदायिक मुक्त विचारधारा पर कठोर तरीके से अमल करते रहना चाहिए।हरियाणा के साथी हिमांशु युवा बलाश ने आंदोलन के पोर्टल तैयार होने की बात की तथा उन्होंने यह भी कहा कि उस पर विभिन्न तरीके के वीडियो अपलोड किए जा चुके हैं। उन्होंने व्हाट्सएप चैनल शुरू करने की तकनीकी पक्ष की जानकारी दी।उन्होंने पोर्टल के माध्यम से नई आजादी उद्घोष नामक पत्रिका अपने बुद्धिजीवी साथियों के सहयोग से जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई।आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए इलाहाबाद के दिनेश यादव ने भी उसकी सक्रियता पर बल दिया। तत्पश्चात पिछले लिए गए फैसलों के अनुसार इसकी प्रबल संभावना है कि एक पखवाड़े में आंदोलन का एक प्रतिनिधिमंडल आजमगढ़ के खिरिया बाग में चल रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में चल रहे आंदोलन को समर्थन देने उक्त स्थान पर जाए। इस प्रतिनिधि मंडल में झारखंड और इलाहाबाद के साथी के जाने की संभावना है।इस बात पर भी बल दिया गया कि जो साथी आंदोलन पोर्टल पर विभिन्न तरीके के लेख बेहतर तरीके से लिख सकते हैं, वह अवश्य लिखें।आंदोलन की अगली पाक्षिक बैठक दिवाली की पूर्व संध्या पर 11 नवंबर को होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के कारपोरेटी लूट के बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी।इस जूम बैठक में अपनी बात रखने वाले उपयुक्त साथी के अलावे मालती जैन तथा मनीष सिन्हा सहित अन्य साथी उपस्थित थे।

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उड़ीसा में पलायन रोकने के लिए जल, जंगल, जमीन तथा संसाधनों की मालकियत पर पूंजीपतियों के बदले वहां की जनता का अधिकार हो :-डॉ मिथिलेश डांगी

आजादी बचाओ आंदोलन की पाक्षिक जूम बैठक 28 अक्टूबर दिन शनिवार को संपन्न हुई। जिसमें उड़ीसा में संसाधनों की स्थिति एवं अदानी की लूट के बारे में आंदोलन के संयोजक डॉक्टर मिथिलेश डांगी ने विस्तार से अपनी बात रखी। उड़ीसा राज्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक  1 अप्रैल 1936 को स्थापित इस राज्य को  इस तिथि के दिन उत्कल दिवस या उड़ीसा दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस समय राज्य में 30 जिले हैं । क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से उड़ीसा भारत का नौवां तथा जनसंख्या के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा राज्य है । कृषि यहां प्रति व्यक्ति कृषि क्षेत्र 0.2 हेक्टेयर से भी कम है।राज्य के कुल क्षेत्रफल का 45% भाग में खेत है, जिसके 80% भाग में चावल की खेती होती है। यहां लगभग 40 लाख खेत हैं, जिनका औसत आकार 1.5 हेक्टेयर है।राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 1,55,707 वर्ग किलोमीटर है इसमें  58,136 वर्ग किलोमीटर में वन फैला हुआ है।इन वनों में आरक्षित वन क्षेत्र 26329 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र 15525 वर्ग किलोमीटर तथा अवर्गीकृत वन 16283 वर्ग किलोमीटर है। वन क्षेत्र राज्य की भौगोलिक क्षेत्रफल का 37.34 प्रतिशत है जो भारत के वनों का 7.53 प्रतिशत होता है।उड़ीसा सरकार ने 1982 से 2013- 2014 तक राज्य के 42,470 हेक्टेयर वन भूमि को 3103 परियोजनाओं के लिए समर्पित किया है। उड़ीसा के खनिज संसाधनों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उड़ीसा में बॉक्साइट, लौह अयस्क, क्रोमाइट, मैंगनीज, तांबा आदि खनिज भंडार है, जिसका बाजारg मूल्य 325 करोड रुपए हैं। जबकि इस राज्य में कुल आबादी लगभग 5 करोड़ की है अर्थात् इस राज्य में प्रति व्यक्ति खनिजों का जो भंडार है, उसका मूल्य लगभग 65 लाख रुपया होता है। लेकिन दुख की बात है कि इस संपूर्ण भंडार को देश की सरकार किसी न किसी पूंजीपति के हाथों सौंपती आ रही है। वह भी इन्हीं जनता के विकास के नाम पर, अर्थात एक व्यक्ति का 65 लाख रुपए की लूट करवाकर विकास का नाम दिया जा रहा है जबकि भारत के संविधान की धारा 39 ‘ ख’ स्पष्ट करता है की इन खनिजों का स्वामित्व और नियंत्रण का अधिकार सिर्फ और सिर्फ समुदाय के हाथों में है। उन्होंने आगे कहा कि इस देश का वर्तमान नौकरशाह पूंजी पतियों का गुलाम है और यह वर्ग सिर्फ इन्हीं पूंजीपतियों के इशारों पर काम करता है। हालांकि इस काम को भी वे जन सेवा कहते हैं तथा जनता के विकास का सब्जबाग दिखाकर पूंजीपतियों के विकास के लिए कार्य करते हैं। इसका ताजा उदाहरण उड़ीसा के सीजीमाली बॉक्साइट ब्लॉक खनन के लिए किए जा रहे जनसुनवाई को देख सकते हैं जहां 16 और 18 अक्टूबर 2023 को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उड़ीसा और जिलाधिकारी के समक्ष जनसुनवाई हुई, जिसमें कंपनी की तरफ से भाड़े के लोग बुलाए गए और उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी गई। उन्हीं पहचान को देखकर जनसुनवाई स्थल पर उन्हें जाने दिया गया। हालांकि स्थानीय साथियों ने इसका विरोध किया और कंपनी के दलालों को खदेड़ा लेकिन यह हाल लगभग सभी खनन क्षेत्र में दिखाई देता है। उन्होंने उड़ीसा में अदानी के प्रोजेक्ट की चर्चा करते हुए कहा कि अदानी उड़ीसा में 57575 करोड रुपए की परियोजना लगा रहा है।इसी क्रम में उन्होंने  इंटीग्रेटेड एलुमिना रिफाइनरी प्रोजेक्ट की चर्चा की। यह रायगढ़ा में स्थापित किया जा रहा है तथा इसके सपोर्ट के लिए इसी जिला के काशीपुर में 175 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट भी लगाया जाएगा ।इस रिफाइनरी प्रोजेक्ट का सालाना उत्पादन चार मिलियन टन होगा तथा इसके लिए बॉक्साइट की आपूर्ति उड़ीसा के ही कालाहांडी और रायगढा जिले के बॉक्साइट ब्लॉक जो वेदांत को आवंटित किया गया है उसके साथ ज्वाइंट वेंचर करके किया जाएगा । आयरन ओर प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा कि यह देवझर, जो क्योंझर जिला में आता है। वहां स्थापित की जा रही है तथा इसकी क्षमता 30 मिलियन टन प्रतिवर्ष होगी। इसी लौह अयस्क पर आधारित एक पिलेट प्लांट की स्थापना भी अदानी के बंदरगाह धामरा के समीप में किया जा रहा है। समुद्री बंदरगाह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अडानी समूह को उड़ीसा में धामरा बंदरगाह 38 वर्षों के लिए सौंपा गया है। इसमें 300 एकड़ भूमि दी गई है। इसकी वार्षिक क्षमता 83 मिलियन टन की है। एक मिलियन टन के लिए अदानी को 270 रूपए बतौर भाड़ा मिलेगा। इसी क्रम में उन्होंने ग्रीन स्टील मिल की चर्चा की। अडानी पोस्को के साथ मिलकर इसकी स्थापना कर रहा है। इस Posco के खिलाफ उड़ीसा में पूर्व मे  बड़ा संघर्ष हो चुका है, जिसमें कंपनी को वापस जाना पड़ा था।सोमपुरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के बारे में डॉक्टर डांगी ने कहा कि यह भी धामरा के निकट त्रिवेणी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर करके किया जा रहा है।त्रिवेणी कंपनी के ऊपर सर्वोच्च न्यायालय के शाह कमीशन ने पूर्व में अवैध खनन का आरोप लगाया है। उन्होंने अदानी समूह के LNG project की चर्चा करते हुए कहा कि यह समूह धामरा के नजदीक लिक्विफाइड नेचुरल गैस का 5 मिलियन टन क्षमता का एक संग्रह एवं विपणन केंद्र की स्थापना कर रहा है। उन्होंने सड़क परियोजनाएं की भी विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि अदानी समूह को रायपुर – विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के बाड़ाकुमारी एवं कार्की सेक्शन के बीच NH 130CD में 47.5 किमी निर्माण एवं स्वामित्व दिया गया है।उस समूह को भारत माला परियोजना में 6 लेन 67.75km सड़क निर्माण तथा टोल वसूली का कार्य दिया गया है।इस प्रकार अदानी उड़ीसा के खनिजों, ईंधनों, समुद्री व्यापार, रेल मार्ग तथा सड़क मार्ग के व्यापार पर कब्जा करने की तैयारी कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उड़ीसा जैसे क्षेत्रों में पलायन को रोकने के लिए जरूरी है कि अडानी जैसे पूंजीपतियों के द्वारा जिस प्रकार खनिज संसाधनों कारपोरेटीकरण  किया जा रहा है, उसका जबरदस्त प्रतिरोध किया जाए।डॉ मिथिलेश डांगी ने आह्वान किया कि इस उल्टी गंगा की धारा को सीधी दिशा में मोड़ने हेतु साझा संघर्ष की ओर एक कदम बढ़ाएं और जल, जंगल ,जमीन एवं खनिज पर जन समुदाय की मालकियत स्थापित होने तक संघर्ष जारी रखें। इस बैठक की एक विशेषता यह रही की उड़ीसा के क्षेत्र में जल, जंगल, जमीन के लिए संघर्ष करने वाले साथी

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देश का कार्पोरेटीकरण अदानी ग्रुप के माध्यम से 2014 के बाद द्रुत गति से बढ़ा–डॉ मिथिलेश डांगी

आजादी बचाओ आंदोलन की पाक्षिक आम बैठक Google Meet के माध्यम से दिनांक 14 अक्टूबर को शाम 8:00 बजे से 9:30 बजे तक सफलतापूर्वक संपन्न हुई।इस बैठक का मुख्य विषय ‘भारत की वर्तमान परिस्थितियां और अडानी की लूट’ था। इसके मुख्य वक्ता आंदोलन के संयोजक डॉक्टर मिथिलेश डांगी थे, जिन्होंने विस्तार से इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।                              गुगल मीट बैठक  उन्होंने बात रखते हुए कहा कि भारत के संविधान में पूंजीवाद का कहीं भी जिक्र नहीं है लेकिन आज देश को पूंजीवादी नीतियों के तहत बढ़ाया जा रहा है। एक समय भारत में 24 लाख रेलकर्मी थे लेकिन निजीकरण के माध्यम से आज की स्थिति सर्वविदित है। उन्होंने संविधान के विभिन्न अनुच्छेदो का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान में समान न्याय, राइट टू वर्क व एजुकेशन, देश में बच्चों को अनिवार्य शिक्षा आदि का जिक्र है लेकिन असंवैधानिक तरीके से लगातार निजी इंस्टिट्यूट को बढ़ाया जा रहा है। एक तरफ शिक्षा तथा स्वास्थ्य का निजीकरण खतरनाक रूप से हो रहा है और दूसरी तरफ नाजायज तरीके से टोल टैक्स वसूला जा रहा है। एक तरफ आंगनबाड़ी सहित प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्रों की संख्या 27 करोड़ के आसपास है, वहीं पर सरकारी शिक्षक की संख्या 97 लाख के करीब है। वहां के पाठ्यक्रम को भी मनमाने तरीके से फेरबदल किया जा रहा है।गांव, प्रखंड तथा जिला स्तर के अस्पताल लगातार खस्ता हाल में है और इन सभी चीजों पर निजीकरण के माध्यम से कॉर्पोरेट का नियंत्रण होता जा रहा है। वर्तमान भारत में चर्चित कॉरपोरेट जगत में से एक अदानी समूह के द्वारा भारत के हरेक क्षेत्र पर निजीकरण के माध्यम से कॉर्पोरेट का प्रभुत्व होता जा रहा है।उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2014 के बाद विभिन्न बंदरगाहों पर अदानी समूह का प्रभुत्व है जैसे पश्चिम बंगाल में हल्दिया, ताजपुर उड़ीसा में धामरा, आंध्र प्रदेश में कृष्णापट्टनम, विशाखापट्टनम आदि, कर्नाटक में बेंगलुरु, गुजरात में मुंद्रा, दहेज,आदि गोवा में पणजी तथा पांडिचेरी, केरल, महाराष्ट्र में एक-एक तथा तमिलनाडु में दो बंदरगाह अदानी समूह के हैं। भारत के तटीय व्यापार पर अदानी समूह का 46% कब्जा है।  जहां पर जल मार्ग की बहुलता नहीं है उस क्षेत्र के कई हवाई अड्डे भी अब अदानी समूह के पास है। जैसे लखनऊ, अहमदाबाद, बेंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी आदि। इसके अलावा 25 अन्य हवाई अड्डे भी आधुनिकीकरण के नाम पर  अदानी समूह को देने की तैयारी है। इस तरह के क्षेत्र उस कॉरपोरेट कंपनी को दिया जा सकता है जिनके पास तीन से चार वर्ष का अनुभव हो, जबकि अदानी समूह के पास इस तरह का अनुभव नहीं है। ठीक उसी प्रकार रेलवे ट्रांसपोर्टेशन में भी अदानी समूह ने अपना प्रभुत्व बढ़ाया है। जैसे मुंबई में छत्रपति शिवाजी टर्मिनल, उत्तर प्रदेश में अयोध्या तथा गोमती, नई दिल्ली के सफदरगंज रेलवे स्टेशन सहित ग्वालियर, इंदौर तथा अहमदाबाद आदि शहरों के चुनिंदा रेलवे स्टेशन पर अब अदानी समूह का नियंत्रण है।ठीक उसी प्रकार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत 600 किलोमीटर लंबाई वाले गंगा एक्सप्रेसवे में से 470 किलोमीटर लंबाई वाली सड़क बनाने का काम अदानी समूह को मिला है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी थर्मल पावर प्लांट के अंतर्गत चार लाख 16 हजार मेगावाट में से 44 हजार मेगावाट के अंतर्गत इस परियोजना में अदानी समूह की भूमिका है।ठीक उसी प्रकार कोल ब्लॉक में भी अदानी समूह को अच्छा खासा शेयर दिया गया है।उन्होंने RSR (Rail ship Rail) योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना भी अदानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई। इसे विस्तार से समझाते हुए उन्होंने कहा कि एक समय झारखंड के पचवारा कोयला खदान से कोयला सीधे पंजाब एनटीपीसी जाती थी। लेकिन अब पाकुड़ के पचवारा से यह कोयला पहले उड़ीसा के पारादीप जाती है, वहां से ship के माध्यम से यह गुजरात के दहेज बंदरगाह जाता है। वहां से फिर यह ट्रेन के माध्यम से पंजाब एनटीपीसी भेजा जाता है। इस तरह जो कोयला झारखंड से सीधे पंजाब एनटीपीसी भेजने पर  प्रति टन 4700 रूपए में चला जाता था, अब वही कोयला अदानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए प्रति टन 7000 रूपए में पंजाब पहुंच रहा है। अग्निवीर योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की योजना का लाभ भी अदानी समूह को मिलेगा। अग्निवीर योजना में काम करने वाले सैनिक चार साल में रिटायर होने के बाद इसी तरह का काम करना पसंद करेंगे। आने वाले दिनों में देश में कई तरह की अव्यवस्था फैलने के आसार हैं। इसका नतीजा यह होगा कि अडानी समूह जैसे कॉरपोरेट कंपनी को हथियारबंद सैनिक की आवश्यकता पड़ेगी। अग्निवीर योजना से रिटायर सैनिक इसमें काम आएंगे। दूसरी तरफ कानपुर में हथियार उत्पादन करने वाली फैक्ट्री का ठेका भी भारत सरकार के द्वारा अडानी समूह को दिया गया है, जिससे इन सैनिकों को हथियार मुहैया कराने में आसानी रहेगी। यह एक प्रकार से देश की संप्रभुता को खतरे में डालने जैसा होगा। डॉ डांगी ने यह भी खुलासा किया कि बॉक्साइट और मैंगनीज आदि क्षेत्रों में भी अदानी समूह काम कर रहा है। उन्होंने मणिपुर में पिछले कई महीने से जारी कुकी-मैतई हिंसा में भी अदानी समूह की भूमिका को जोड़ते हुए कहा कि अडानी समूह को वहां पर पाम आयल तेल की खेती करनी है और इस समूह को वहां पर बसाने के लिए भी इस हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह उन्होंने कहा कि भूमि, जल, वायु सहित सभी क्षेत्रों में इस कॉर्पोरेट कंपनी का अच्छा खासा प्रभुत्व हो चुका है। 2014 के पहले इस देश में जिन-जिन क्षेत्रों में कॉर्पोरेट का प्रभुत्व था, आज उस क्षेत्र में पहले के मुकाबले कहीं अधिक इस पूंजीवादी शक्तियों का कब्जा है और रोचक बात यह है कि उस पर केवल एक पूंजीपति गौतम अडानी का कब्जा है। इससे पता चलता है कि अदानी की लूट की फेहरिस्त काफी लंबी है। हिंदुस्तान की हुकूमत उसके द्वारा ही govern हो रही है। 2014 के पहले भी विभिन्न बंदरगाहों पर कॉरपोरेट का कब्जा था लेकिन बड़े-बड़े बंदरगाह सरकार द्वारा संचालित होते थे लेकिन आज मुंद्रा जैसे बंदरगाह भी अदानी समूह के हाथ में है। इन सब परिस्थितियों के मद्देनजर देश में

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